Friday, July 2, 2010

इन भाई साहब से बचकर रहना क्युकि ये है ''ताफ्रिबाज़''

इन भाई साहब से बचकर रहना क्युकि ये है ''ताफ्रिबाज़''


ताफ्रिबाज़ ; इन भाईजान को कोई और काम है की नहीं, किसी की भी पोस्ट लेकर उसका मजाक बनाना इनकी आदत है क्या?

लेकिन मैं इनका शुक्रिया करना चाहूँगा, क्युकि यह न चाहते हुए भी मुझे हिट करने में लगे हैं!

मैं आपके ब्लॉग का वेलकम करता हूँ !



शुक्रवार, २ जुलाई २०१०पोस्ट हिट है वाह जी वाह !





ताफ्रिबाज़ भाई जान को अब इस ब्लॉग पर जलन हो रही है की इनकी चार लाइने ही हिट हो जाती है पर बिचारे हमारे ब्लॉग के भाई



ताफ्रिबाज़ भाई को कोई हिट नहीं करता कुछ करो यारो बरना यह लोगो को जीने नहीं देंगे कसम खा रखी है





आदरनिये संगीता स्वरुप जी की पोस्ट पर बहुत सरे कमेन्ट है और पोस्ट में चार लाइन ही है ! चार लाइन होते हुवे भी पोस्ट हिट है वाह जी वाह !



Thursday, 1 July 2010



ख्वाब और ख्वाहिश



लबों पर



मुस्कान



और



आँखों में



नमी है



ख़्वाबों के



अम्बार



पर



ख्वाहिशों की



कमी है .



http://blogchoupal.blogspot.com/2010/07/blog-post.html



Posted by संगीता स्वरुप ( गीत ) at 7/01/2010 09:54:00 PM



Labels: छोटी नज़्म ( सर्वाधिकार सुरक्षित )



29 comments:



Etips-Blog Team said...



सानदार प्रस्तुती के लिऐ आपका आभारसुप्रसिद्ध साहित्यकार व ब्लागर गिरीश पंकज जीइंटरव्यू पढेँ >>>>एक बार अवश्य पढेँ



Thu Jul 01, 09:58:00 PM



मनोज कुमार said...



ख़्वाबों के अम्बार पर ख्वाहिशों की कमी है .अपनी इन्द्रियों पर सम्‍पूर्ण नियन्‍त्रण ही सच्‍ची विजय है।



Thu Jul 01, 10:00:00 PM



राजेश उत्‍साही said...



माफ करें संगीता जी, बात कुछ जमी नहीं। बिना मुस्‍कान और आंखों की नमी तो साथ साथ हो सकती है। पर बिना ख्‍वाहिशों के ख्‍वाबों के अम्‍बार कैसे लग सकते हैं। हां आप अगर कहतीं कि ख्‍वाहिशों के अम्‍बार पर ख्‍वाबों की कमी है तो बात बनती है। खैर यह मेरा नजरिया है।



Thu Jul 01, 11:01:00 PM



राजेश उत्‍साही said...



कृपया मेरी पहली टिप्‍पणी में दूसरी पंक्ति को इस तरह पढें -लबों पर मुस्‍कान और आंखों में नमी तो साथ साथ्‍ा हो सकती है।



Thu Jul 01, 11:03:00 PM



अनामिका की सदाये...... said...



मन की बात को थोड़े ही शब्दों में कह देने की आपकी कला का कोई सानि नहीं है..बहुत सुन्दर



Thu Jul 01, 11:32:00 PM



Vivek Jain said...



वाह, वाकई शानदार vivj2000.blogspot.com



Thu Jul 01, 11:42:00 PM



rashmi ravija said...



चंद शब्दों में ,बहुत कुछ कह दिया...



Thu Jul 01, 11:56:00 PM



kshama said...



Kam alfaaz aur athaah gahrayi..yahi khasiyat hai aapki...Mai apni malika"Bikhare Sitare" punah prakashit kar rahi hun...iltija hai ki,gar samay mile to zaroor padhen ek samajik sarokar aur maqsad rakhte hue yah jeevani safar karegi...safarname me shamil hoke rahnumayi karen!



Fri Jul 02, 12:11:00 AM



mukti said...



बहुत प्यारी कविता है और क्या कहूँ???? आपके शब्द सच में मोती हैं... पर बिखरे नहीं गुंथे हुए...



Fri Jul 02, 12:20:00 AM



संगीता स्वरुप ( गीत ) said...



राजेश जी ,सच है की सबका नजरिया अलग अलग होता है....और हर बात अलग नज़रिए से लिखी जाती है..पर पढने वाला अपने नज़रिए से सोचता है...आपकी बात भी अपनी जगह सही है...कि ख्वाहिशें होतीं हैं तो ख्वाब देखे जाते हैं....पर वो उम्र कम से कम मेरी तो निकल चुकी है..और यथार्थ के धरातल पर आज ख्वाब तो बरकरार हैं पर सच्चाई ने ख्वाहिशों का दम तोड़ दिया है....आपने इतने गौर से पढ़ा...अच्छा लगा..आभार सभी पाठकों का आभार



Fri Jul 02, 12:32:00 AM



सम्वेदना के स्वर said...



आज उधार के अल्फाज़ लेकर अपनी बात कह रहा हूँ… अल्फाज़ उधार के हो सकते हैं बयान मेरे दिल का है, एकदम हू ब हूपहले हिस्से पर क़ैफी साहबः“आँखों में नमी, हँसी लबों पर क्या हाल है, क्या दिखा रहे हो.”और दूसरे हिस्से पर चचा ग़ालिबः“हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले.”संगीता जी, आपकी व्याख्या कविता की परिपूरक है.



Fri Jul 02, 12:52:00 AM



lokendra singh rajput said...



bahut khoob... chand alfaaj mein bahut kah gayein aap



Fri Jul 02, 01:24:00 AM



दीपक 'मशाल' said...



चंद खूबसूरत शब्दों में बेहतरीन अभिव्यक्ति.. सच में यही कविता है..



Fri Jul 02, 05:31:00 AM



डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...यह बताशा जैसा मुक्तक तो बहुत ही बढ़िया रहा!



Fri Jul 02, 06:03:00 AM



Deepak Shukla said...Hi di..Khwahish se hi khwab panapte..Khwabon main khwahish dikhtin..Kuchh unme pure ho jaate..Kuchh bas khwahish hi rahtin..Hothon par muskaan tumhaare..Aankhen aakhir kyon nam hain..Humko 'di' ye batla do..Aakhir tumko kya gam hai..Hothon par muskan hotere..Ankh kabhi bhi na hon nam..Har khwahish ho puri teri..Vinti Prabhu se karte hum..Deepak..



Fri Jul 02, 07:09:00 AM



ललित शर्मा said...ख्वाबों और ख्वाहिशों के लिए कहीं कभी कोई सीमाओं का बंधन नही।उम्दा कवित्तआभार



Fri Jul 02, 09:07:00 AM



संगीता स्वरुप ( गीत ) said...दीपक, इतनी प्यारी कविता लिखने का बहुत सारा आभार..



Fri Jul 02, 10:07:00 AM



स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...ख़्वाबों के अम्बार पर ख्वाहिशों की कमी है .ye achha hai mumma...:)



Fri Jul 02, 11:04:00 AM

वन्दना said...ज़िन्दगी का यथार्थ दर्शाती बहुत ही सुन्दर कविता…………दिल मे उतर गयी…………………बेहद उम्दा ख्याल्।



Fri Jul 02, 11:43:00 AM



स्वाति said..थोड़े ही शब्दों में बेहतरीन अभिव्यक्ति..



Fri Jul 02, 12:11:00 PM



sheetal said...Kam sabdh mae gehri baat.



Fri Jul 02, 12:59:00 PM



sanu shukla said...बहुत सुंदर रचना..!!



Fri Jul 02, 01:32:00 PM



डा. अरुणा कपूर. said...धन्यवाद संगीताजी!.. बहुत अच्छा महसूस हुआ कि आप मेरे ब्लोग पर आई और गलतियों की तरफ इंगित किया!... आप की यह कविता मुझे भाव-विभोर कर रही है!... नपे-तुले शब्दों में आपने बहुत कुछ कह डाला है...फिर एक बार धन्यवाद!



Fri Jul 02, 01:50:00 PM



asad ali said...लबों पर मुस्कान और आँखों में नमी है ख़्वाबों के अम्बार पर ख्वाहिशों की कमी है .तन्हाई का आलम अब इस तरह है तेरे इंतजार में अब साँसे थमी है !आपका ब्लॉग आच्छा है ऐसे ही लिखते रहिये



Fri Jul 02, 02:27:00 PM



Shah Nawaz said...अल्लाह अनाम को सेहत व तन्दुर्सुती अता फरमाए. और आपको और हम सबको अपने अपने इम्तिहान में कामयाब करे. आमीन!



Fri Jul 02, 03:15:00 PM



राजकुमार सोनी said...एक चर्चित शेर हैं-हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पर दम निकलेबहुत निकले अरमान मेरे फिर भी बहुत कम निकलेख्वाहिशों का मामला ही कुछ ऐसा है।शानदार रचना। कम शब्दों का कमाल।



Fri Jul 02, 03:30:00 PM



shikha varshney said...वाह दी वाह ... क्या दृश्य उभारा है ..ख़्वाबों के अम्बार पर ख्वाहिशों की कमी हैवाह बहुत सुन्दर.



Fri Jul 02, 04:09:00 PM



Avinash Chandra said...Bilkul sahi..sateek rachna...kitne kam shabd kharchtee hain aap :) :)khwaab to aate rahenge, doctor kahte hain aankhe badi nahi hoti bachpan se hi...Din dekh dekh khwahishein sookh jaatin hain magar...Kabhi pitaji ke liye likhi thi...khet ki medein jodte,khwaahishein nahi paalta,kabhi khuda mera.yon meri bulandiyon ke khawab,jhaankte hain uske koron se.waise hi ehsaas hue :)Pranam



Fri Jul 02, 06:52:00 PM



Asha said...बहुत सुन्दर भाव संक्षेप मैं बहुत कुछ कह दिया आपने बधाई आशा



अब ये इनके ब्लॉग के टिप्पणी है जो की 60% से ज्यादा इन्होने ही लिखे हैं





प्रस्तुतकर्ता Tafribaz पर ६:५७ AM इसे ईमेल करें इसे ब्लॉग करें! Twitter पर साझा करें Facebook पर साझा करें Google Buzz पर शेयर करें 8 टिप्पणियाँ:









Ratan Singh Shekhawat ने कहा… अपना -अपना पाठक नेटवर्क है जी ! पोस्ट में चार लाइन हों या चार शब्द , पढने व टिप्पीयाने वाले तो आयेंगे ही अपनी पसंद के लेखक को पढने के लिए पाठक पोस्ट की लम्बाई नहीं देखते :)



२ जुलाई २०१० ७:२२ AM



Tafribaz ने कहा… यह पोस्टलेखक के द्वारा निकाल दी गई है.



२ जुलाई २०१० ७:२८ AM



Tafribaz ने कहा… Ratan singh sir aap ki bat theek hai par post me kuch to likha hona chahiye ya sirf char shabdo se hi post hit kara ली aisa to nahi hona chahiye



२ जुलाई २०१० ७:२८ AM



Raji Kumar ने कहा… Tafribaz जी संगीता जी बहुत अच्छे लिखिका है !



२ जुलाई २०१० ७:३० AM



Tafribaz ने कहा… Raji Kimar ji hamne kab kaha ke acchi lekhak nahi hai par itne comments ye topic hai



२ जुलाई २०१० ७:३७ AM



Samaj ने कहा… रतन सिंह जी से सहमत !



२ जुलाई २०१० ७:५१ AM



Tafribaz ने कहा…

samaj ji aap ki bat theek hai par post me kuch to likha hona chahiye ya sirf char shabdo se hi post hit kara ली aisa to nahi hona chahiye



२ जुलाई २०१० ७:५२ AM

6 comments:

  1. kya yr khud hi ladte rahte ho kuch aur kaam nahi hai kya kuch aacha lokho yaar likhne ko sara jaha pada hai

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  2. ????????????????????????????????

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  3. वैसे तो आपकी इस पोस्ट का औचित्य नहीं समझ आया भाई..बढ़िया लिखिये और नियमित लिखिये. इन सब बातों में न पड़ें.

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  4. आप का स्वागत है आगे से इसका ख्याल रहेगा
    धन्यबाद .............आप तीनो का

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  5. असद अली जी,

    आप ऐसी चर्चाओं में ना पड़ें....तफरी बाज़ कोई भी हो सकता है...और फिर तफरी ही तो ले रहा है ना ...तो लेने दीजिए...कम से कम अपने में खुश है ना...यदि किसी भी कारण से थोड़ी सी खुशी हमारी वजह से मिल जाती है तो हमारा क्या जाता है....आप अपने स्तरीय लेखन पर ध्यान दें....

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  6. अरे बेकार की पब्लिसिटी का तरीका है ये बस ...आप इन चक्करों में न पडिये..सार्थक लिखिए बस

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